Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full Free 【90% TOP-RATED】

मुख्य जिनालय के बाहर स्थित रायण वृक्ष के नीचे भगवान आदिनाथ के चरण पादुका (पगला) हैं। यहाँ बैठकर चैत्यवंदन करने का अनंत गुना फल मिलता है।

चैत्यवंदन क्या है और इसका महत्व

यदि आप इस चैत्यवंदन की विधि को और अधिक विस्तार से समझना चाहते हैं, तो मुझे बताएं। मैं आपको इसके या भाव यात्रा के बारे में अधिक जानकारी दे सकता हूँ। Share public link

यह मन को शांत कर आगे की चढ़ाई के लिए शक्ति प्रदान करता है।

- द्वितीय चैत्यवंदन palitana 5 chaityavandan in hindi full

संक्षिप्त चैत्यवंदन विधि (सभी स्थानों के लिए)

प्रत्येक चैत्यवंदन के बाद खमासमण और नमुत्थुणं (शक्रास्तव) किया जाता है।

यह 'प्रवेश द्वार' है जहाँ हम पर्वतराज को वंदन कर अपनी यात्रा सफल बनाने की प्रार्थना करते हैं। स्तवन:

एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरि नी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;मरुदेवानंदना, वंदन करूं त्रण काळ।आ तीर्थ जाणी, पूर्व नवानुं वार;आदीश्वर आव्या, जाणी लाभ अपार। प्रभु प्रतिमा वंदो

चैत्यवंदन एक संरचित अनुष्ठान है जिसमें विशिष्ट जैन सूत्रों, स्तुतियों और प्रार्थनाओं का पाठ किया जाता है। यह अनुष्ठान को विकसित करने के लिए किया जाता है। इसमें नमोकार मंत्र (नवकार मंत्र) जैसे महत्वपूर्ण जैन सूत्रों का पाठ शामिल होता है।

शत्रुंजय सम तीरथ नहीं, ऋषभ समो नहीं देव,पुंडरीक सम गणधर नहीं, करो निरंतर सेव।पंचम गति पावण तणो, ए जे उत्तम पंथ,सिद्ध कूट को वंदना, नमे सदा जग संत।।

नाभिनंदन मरुदेवी सुत, युगादि देव कल्याणी।शत्रुंजय पर्वत सोहामणा, अमृत जैसी वाणी।।चौसठ इंद्र मली करी, कीधो जव अभिषेक।तस चरणी मस्तक नमुं, धरी भाव विशेष।।

पालीताणा, गुजरात राज्य का एक छोटा सा शहर, जो जैन धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। यहाँ स्थित पालीताणा ५ चैत्यवंदन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है, जो अपनी अद्वितीय वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। रायण हेठे पादुका

मृगलांछन जिन आयुखूं, लाख वरस प्रमाण,हस्तिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण। (२)

विमल गिरि की कंदरा, सोहे माता आप,सुमिरन करते आपनो, भागे सब संताप।भक्ति भाव से जो नमे, शासन देव प्रसन्,विघ्न टले सब काज के, निर्मल होवे मन्न।। 2 ।।

जय तळेटी चैत्यवंदन (Jay Taleti)